कृष्ण कहते हैं — सांख्य और योग को अलग-अलग मानना केवल कम समझ वाले लोगों की बात है। जो सचमुच जानते हैं, वे जानते हैं कि दोनों एक ही सत्य तक पहुँचाते हैं।
जैसे गाँव जाने के दो रास्ते हों — एक पहाड़ से होकर, एक नदी के किनारे-किनारे। मंज़िल एक ही है। जो किसी एक रास्ते पर भी ध्यान से, पूरे मन से चले — वह पहुँच जाएगा। दोनों रास्तों का फल एक ही है।