📿 श्लोक संग्रह

कामक्रोधवियुक्तानाम्

गीता 5.26 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 5 — कर्मसंन्यासयोग
कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् ।
अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥
कामक्रोधवियुक्तानाम्
काम और क्रोध से मुक्त
यतीनाम्
संयमी यतियों के लिए
यतचेतसाम्
वश में किए हुए चित्त वाले
अभितः
चारों ओर, सर्वत्र
ब्रह्मनिर्वाणम्
ब्रह्म की शांति
वर्तते
विद्यमान है
विदितात्मनाम्
आत्मा को जानने वाले

काम और क्रोध से मुक्त, मन को वश में किए हुए, आत्मा को जानने वाले यतियों के लिए ब्रह्मनिर्वाण चारों ओर है।

यहाँ 'अभितः' — चारों ओर — बड़ा सुंदर शब्द है। जैसे दीपक के चारों ओर प्रकाश होता है, उसे ढूँढना नहीं पड़ता — वैसे ही ऐसे संतों के लिए ब्रह्म की शांति सर्वत्र है।

यह श्लोक 5.25 और 5.26 का समापन करता है। दोनों में ब्रह्मनिर्वाण का वर्णन है — पहले पाप-मुक्त ऋषियों के लिए, यहाँ काम-क्रोध से मुक्त यतियों के लिए।

परंपरा में 'अभितः' पद को विशेष महत्व दिया गया है — ब्रह्मनिर्वाण कोई दूर की मंज़िल नहीं, यह सर्वत्र है।

अध्याय 5 · 26 / 29
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