जिन ऋषियों के पाप क्षीण हो गए, संशय कट गए, मन वश में है, और जो सब प्राणियों के हित में लगे हैं — वे ब्रह्मनिर्वाण पाते हैं।
यहाँ चार गुण बताए गए हैं। पाप-मुक्ति, संशय-मुक्ति, मन का संयम, और सबके भले की चाहत। ये चारों मिलें तो ब्रह्म की शांति मिलती है। अकेला एक गुण काफ़ी नहीं।