कृष्ण कहते हैं — जिनका मन समभाव में स्थित है, उन्होंने इसी जीवन में संसार को जीत लिया। क्योंकि ब्रह्म निर्दोष है, सबमें सम है — और ऐसे लोग ब्रह्म में ही स्थित हैं।
जैसे तराज़ू दोनों तरफ़ बराबर हो तो वह संतुलित कहलाता है। जिसका मन सुख-दुख, मान-अपमान में बराबर रहे — वह इसी धरती पर मुक्त है। आगे का चक्र उसे नहीं बाँधता।