अर्जुन का यह प्रश्न बहुत स्वाभाविक है। वे कहते हैं — कृष्ण, आपका जन्म अभी हुआ है, सूर्यदेव विवस्वान् तो युगों पुराने हैं। तो यह कैसे माना जाए कि आपने आरम्भ में उन्हें यह योग सिखाया? यह प्रश्न वैसा ही है जैसे कोई बच्चा पूछे — दादाजी ने आपको कैसे सिखाया जब आप तो दादाजी से छोटे हैं?
यह प्रश्न गीता में एक बड़े रहस्य का द्वार खोलता है — भगवान के जन्म और मनुष्य के जन्म में क्या अंतर है। अगले दो श्लोकों में कृष्ण इसका उत्तर देते हैं।