कृष्ण यहाँ सीधे आदेश देते हैं — अपना नियत कर्म करो। 'नियत' का अर्थ है — जो तुम्हारे स्वभाव और स्थिति के अनुसार तय है, जो तुम्हारा कर्तव्य है। अर्जुन के लिए यह युद्ध है। कर्म न करना कर्म करने से कमजोर है।
एक बहुत व्यावहारिक बात भी कही — शरीर को जीवित रखना भी तो कर्म पर निर्भर है। खाना, पानी, सोना — ये सब कर्म हैं। बिना कर्म के शरीर भी नहीं चलता।