यह तीसरे अध्याय का अंतिम और सबसे शक्तिशाली श्लोक है। कृष्ण कहते हैं — बुद्धि से परे आत्मा को जानो, आत्मा से मन को दृढ़ करो और फिर काम रूपी शत्रु को जीतो।
'दुरासदम्' — जीतना कठिन, पर असंभव नहीं। आत्मज्ञान ही वह हथियार है जिससे काम को जीता जा सकता है। यह शत्रु बड़ा है — पर आत्मा उससे भी बड़ी है।