यहाँ एक सीढ़ी बनाई गई है — शरीर से इंद्रियाँ श्रेष्ठ, इंद्रियों से मन श्रेष्ठ, मन से बुद्धि श्रेष्ठ, और बुद्धि से भी परे जो है — वह आत्मा है।
यह सीढ़ी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि काम इन सब में बसता है। जब आत्मा की पहचान हो जाती है, तो काम का निवास सब पहचाने जाते हैं। आत्मा काम से परे है — वहाँ पहुँचना ही लक्ष्य है।