कृष्ण यहाँ एक सुंदर आश्वासन देते हैं। जो लोग इस शिक्षा को श्रद्धा से — बिना शक किए, बिना आलोचना किए — पालन करते हैं, वे भी कर्म-बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
'ते अपि' — 'वे भी' — यह शब्द महत्वपूर्ण है। पूर्ण ज्ञान न भी हो, पर यदि श्रद्धा हो और पालन हो — तो भी मुक्ति संभव है। यह गीता की उदारता है।