यहाँ कृष्ण अर्जुन के प्रश्न का उत्तर देते हैं। वे कहते हैं — यह दो मार्गों की बात नई नहीं है। मैंने पहले से ही दो मार्ग बताए हैं — सांख्यों के लिए ज्ञानयोग और योगियों के लिए कर्मयोग। अर्जुन को 'अनघ' कहकर पुकारा — यानी निष्पाप।
यह श्लोक स्पष्ट करता है कि ज्ञान और कर्म दोनों मार्ग वैध हैं। एक व्यक्ति की स्वभाव और परिस्थिति तय करती है कि कौन-सा मार्ग उसके लिए उचित है।