अर्जुन का यह दूसरा प्रश्न और भी सीधा है। वे कहते हैं — तुम्हारी बातें मिली-जुली हैं, मेरी समझ में नहीं आ रहीं। एक निश्चित बात बताओ जिससे मेरा भला हो। यह प्रश्न किसी भी शिष्य का हो सकता है।
यहाँ 'इव' शब्द महत्वपूर्ण है — अर्जुन पूरी तरह आरोप नहीं लगा रहे, बस विनम्रता से कह रहे हैं 'मानो भ्रमित हो रहा हूँ'। यह उनकी शिष्य-भावना दिखाता है।