यह 3.26 की बात को और स्पष्ट करता है। जो लोग अभी गुणों में ही उलझे हैं — जिनकी बुद्धि अभी उस स्तर पर नहीं — उन्हें पूर्ण ज्ञानी को अचानक आत्मज्ञान की बातें सुनाकर विचलित नहीं करना चाहिए।
यह एक गहरी शिक्षा है — शिक्षा श्रोता की क्षमता के अनुसार होनी चाहिए। जो अभी कर्म में आसक्त है, उसे पहले कर्म करना सिखाओ — फिर धीरे-धीरे अनासक्ति की ओर ले जाओ।