यहाँ अज्ञानी और ज्ञानी दोनों कर्म करते हैं — पर उनके भाव अलग हैं। अज्ञानी आसक्ति से करता है — फल की चाह से। ज्ञानी वैसा ही दिखने वाला कर्म करता है, पर भीतर अनासक्त रहता है।
ज्ञानी क्यों कर्म करता है? 'लोकसंग्रह' — समाज को एकजुट रखने के लिए, लोगों की भलाई के लिए। उसका उद्देश्य ऊँचा है — केवल अपना फल नहीं।