यहाँ कृष्ण एक बड़ी जिम्मेदारी की बात करते हैं। यदि वे कर्म न करें तो पूरा संसार अव्यवस्था में डूब जाएगा। 'संकर' — यानी भ्रम और अव्यवस्था। महान लोगों के कर्म से ही समाज की व्यवस्था चलती है।
यह श्लोक हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है। श्रेष्ठ जब कर्म छोड़ते हैं, तो उसके परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ते हैं।