यहाँ कृष्ण एक सरल तर्क देते हैं। यदि वे — जो सर्वशक्तिमान हैं — कर्म न करें, तो मनुष्य उनके मार्ग का अनुसरण करेंगे और वे भी कर्म छोड़ देंगे। इससे सारी व्यवस्था टूट जाएगी।
'अतन्द्रितः' — बिना आलस्य के। यह शब्द महत्वपूर्ण है। कृष्ण जो कर्म करते हैं, वह सजगता से, पूरे ध्यान से करते हैं — यही आदर्श कर्मयोग है।