कृष्ण यहाँ एक गहरी बात कहते हैं। वे कहते हैं — मुझे तीनों लोकों में कुछ भी करना शेष नहीं, कोई भी चीज़ पाने की मुझे जरूरत नहीं — फिर भी मैं कर्म में लगा रहता हूँ।
यह श्लोक 3.20 के जनक-उदाहरण का दूसरा पहलू है — अब कृष्ण स्वयं को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं। जो सर्वशक्तिमान है, वह भी कर्म करता है — तो साधारण मनुष्य को क्यों नहीं करना चाहिए?