इस श्लोक में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो लोग समाज में बड़े या सम्मानित माने जाते हैं, उनका आचरण बहुत मायने रखता है। वे जैसा करते हैं, बाक़ी लोग भी वैसा ही करने लगते हैं। जैसे घर में दादा-दादी सुबह जल्दी उठते हैं तो बच्चे भी जल्दी उठना सीखते हैं।
यहाँ 'प्रमाण' शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है। श्रेष्ठ पुरुष जो करता है, वही दूसरों के लिए मानदंड बन जाता है। अगर एक शिक्षक समय पर आता है, तो विद्यार्थी भी समय पर आएँगे। अगर शिक्षक ही देर से आए, तो विद्यार्थियों से समय की अपेक्षा कैसे की जाए?
यह श्लोक हर उस व्यक्ति के लिए है जो किसी भी रूप में दूसरों का मार्गदर्शन करता है — चाहे माता-पिता हों, चाहे शिक्षक, चाहे कोई भी बड़ा। आचरण शब्दों से अधिक शक्तिशाली होता है।