यह तीसरे अध्याय का पहला श्लोक है और यहाँ अर्जुन बोलते हैं। दूसरे अध्याय में भगवान ने ज्ञान की महिमा बताई थी। अर्जुन को लगा — यदि ज्ञान ही श्रेष्ठ है, तो फिर इस भयंकर युद्ध में क्यों उतरूँ? उनका प्रश्न स्वाभाविक है।
अर्जुन भ्रमित हैं — एक तरफ ज्ञान की बात, दूसरी तरफ युद्ध का आदेश। वे कृष्ण को दो नामों से पुकारते हैं — 'जनार्दन' और 'केशव'। यह प्रेम और विश्वास दोनों दिखाता है।