संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं — इस प्रकार हृषीकेश (कृष्ण) से कहकर, गुडाकेश (अर्जुन) ने गोविंद से 'मैं नहीं लड़ूँगा' — इतना कहकर मौन हो गए। यह वाक्य बहुत सरल है लेकिन बहुत भारी है।
गुडाकेश का अर्थ है जिसने निद्रा को जीत लिया हो — अर्जुन एक जागे हुए, सचेत वीर हैं। फिर भी वे चुप हो जाते हैं। यह चुप्पी हार की नहीं, बल्कि गहरे भ्रम की निशानी है।