कृष्ण यहाँ एक ईमानदार सत्य बताते हैं — हे कौन्तेय, प्रयत्न करने वाले विद्वान पुरुष का मन भी ये विचलित करने वाली इंद्रियाँ बलपूर्वक हर ले जाती हैं। यह कोई कमज़ोरी की बात नहीं — यह मानव-प्रकृति की वास्तविकता है।
यह बात बहुत आश्वस्त करने वाली है। जो लोग अपनी इंद्रियों पर काबू नहीं रख पाते वे अकेले नहीं हैं। बड़े-बड़े ज्ञानी भी इस चुनौती का सामना करते हैं। इसीलिए इंद्रिय-संयम के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है।