कृष्ण कहते हैं — उन सब इंद्रियों को संयमित करके, मुझे परम लक्ष्य मानते हुए, योगयुक्त होकर बैठो। जिसकी इंद्रियाँ वश में हैं, उसकी प्रज्ञा स्थिर है। यहाँ कृष्ण उपाय बताते हैं — अपनी शक्ति से इंद्रियाँ काबू करना कठिन है, मुझ (परमात्मा) में मन लगाओ।
यह भक्तियोग का सार है। जब मन किसी उच्च लक्ष्य में लगा हो, तो वह छोटे-छोटे विषयों में नहीं भटकता। जैसे एक बच्चा जब अपनी मनपसंद किताब में डूबा हो तो बाहर की आवाज़ें कम सुनाई देती हैं।