कृष्ण बताते हैं — बुद्धि-युक्त मनीषी कर्म से उत्पन्न फल को छोड़कर जन्म-बंधन से मुक्त होकर उस स्थान को जाते हैं जो दुःख-रहित है। यह मोक्ष का सरल और सुंदर वर्णन है।
'अनामयम् पदम्' — जो स्थान दुःख से रहित है। यह स्वर्ग नहीं है जहाँ पुण्य क्षीण होने पर वापसी हो। यह वह अवस्था है जहाँ से लौटना नहीं — जहाँ जन्म-मृत्यु का चक्र समाप्त होता है।