कृष्ण कहते हैं — कोई इस आत्मा को अद्भुत की तरह देखता है, कोई अद्भुत की तरह बताता है, कोई अद्भुत की तरह सुनता है — और सुनकर भी कोई इसे पूरी तरह नहीं जान पाता। आत्मा की यह अबूझ प्रकृति ही उसे महान बनाती है।
यह बात हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी लागू होती है। आकाश के बारे में बच्चा सोचे, वैज्ञानिक पढ़े, दार्शनिक चर्चा करे — फिर भी आकाश की पूरी थाह किसी को नहीं मिलती। आत्मा भी ऐसी ही है।