कृष्ण यहाँ एक दूसरा तर्क देते हैं। वे कहते हैं — यदि तुम इसे नित्य जन्मने और नित्य मरने वाला भी मानो, हे महाबाहु, तब भी इसके लिए शोक करना उचित नहीं है। यह तर्क उन लोगों के लिए है जो आत्मा की अमरता को स्वीकार नहीं करते।
कृष्ण कह रहे हैं — चाहे कोई भी दर्शन मानो, शोक तो व्यर्थ है ही। यदि जन्म-मृत्यु नित्य प्रक्रिया है, तो फिर किसी एक मृत्यु के लिए इतना शोक क्यों? यह तर्क बहुत व्यावहारिक है।