संजय का अंतिम और सबसे शुभ वचन — जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं — वहाँ श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है। यह मेरा दृढ़ मत है।
यह चार शब्द — श्री (शोभा), विजय (जीत), भूति (समृद्धि), नीति (धर्म-आधारित नैतिकता) — एक आदर्श जीवन के चार स्तंभ हैं। जहाँ ईश्वर का ज्ञान और मनुष्य का समर्पण मिलते हैं — वहाँ ये चारों होते हैं।