📿 श्लोक संग्रह

अध्येष्यते च य इमम्

गीता 18.70 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 18 — मोक्षसंन्यासयोग
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः ।
ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः ॥
अध्येष्यते
पाठ करेगा — अध्ययन करेगा
धर्म्यम् संवादम्
धर्म-संवाद — यह पवित्र वार्तालाप
आवयोः
हम दोनों का — मेरा और अर्जुन का
ज्ञानयज्ञेन
ज्ञान-यज्ञ से
तेन अहम् इष्टः
उसके द्वारा मेरी पूजा होगी
मे मतिः
मेरा मत — मेरी दृष्टि

भगवान कहते हैं — जो इस हम दोनों के धर्म-संवाद (गीता) का पाठ करे — वह ज्ञान-यज्ञ से मेरी पूजा करता है — यह मेरा मत है।

गीता-पाठ को यज्ञ कहा गया है। यज्ञ का अर्थ है — समर्पण। जो गीता पढ़े, समझे और जिए — वह परमात्मा की पूजा कर रहा है।

'ज्ञानयज्ञ' — ज्ञान से की गई पूजा। गीता 4.33 में कहा था — 'सब यज्ञों में ज्ञान-यज्ञ श्रेष्ठ है।' यहाँ वही बात फिर आती है।

गीता पढ़ना — यह कर्मकांड नहीं, यह ज्ञान-यज्ञ है। यही इसे अन्य ग्रंथों से अलग बनाता है।

अध्याय 18 · 70 / 78
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