भगवान कहते हैं — यह गीता का ज्ञान उसे कभी मत सुनाओ जो तपहीन हो, जो भक्तिहीन हो, जो सुनना न चाहता हो, और जो मेरी निंदा करता हो।
यह निषेध प्रेम से है — गीता का ज्ञान बहुमूल्य है। अनुपयुक्त स्थान पर देने से उसकी गरिमा कम होती है और सुनने वाले का अहित होता है।