भगवान का प्रत्यक्ष निर्देश — सब कर्मों को मन से मुझे समर्पित करो, मुझे परम लक्ष्य मानो, बुद्धि-योग का आश्रय लो, और मुझमें चित्त लगाए सदा रहो।
यह चार बातें एक साथ — अर्पण, लक्ष्य, विवेक, और ध्यान। यही पूर्ण भक्ति-कर्मयोग का सार है। सब करो, पर भीतर से मेरे साथ रहो।