भगवान कहते हैं — भक्ति के द्वारा ही कोई मुझे तत्त्व से जान सकता है — मैं जितना और जो हूँ। और उस तत्त्व-ज्ञान के बाद वह तत्क्षण मुझमें प्रवेश कर जाता है।
यह अत्यंत सुंदर और गहरा वचन है। ज्ञान-मार्ग से भी अंत में भक्ति आती है। और भक्ति से जो ज्ञान होता है — वह प्रत्यक्ष, तत्काल अनुभव है।