ब्रह्म-भाव की साधना के लिए पहले चार कदम — शुद्ध बुद्धि से युक्त होना, धृति से आत्मा को वश में करना, शब्द-स्पर्श-रूप जैसे इंद्रिय-विषयों को छोड़ना, और राग-द्वेष को दूर करना।
यह श्लोक एक क्रमिक साधना का आरंभ है। पहले भीतर को शुद्ध करो, फिर इंद्रियों को साधो, फिर राग-द्वेष हटाओ। यही ब्रह्म-मार्ग की तैयारी है।