भगवान कहते हैं — हे कौन्तेय, सिद्धि प्राप्त करके ब्रह्म को कैसे प्राप्त किया जाता है — यह सर्वोच्च ज्ञान-निष्ठा मुझसे संक्षेप में सुनो।
यह श्लोक एक नई शिक्षा-धारा का द्वार खोलता है। सिद्धि प्राप्ति — और फिर ब्रह्म-प्राप्ति। ये दो चरण हैं। अगले श्लोकों में इनका विवरण आएगा।