📿 श्लोक संग्रह

सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म

गीता 18.50 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 18 — मोक्षसंन्यासयोग
सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे ।
समासेनैव कौन्तेय निष्ठा ज्ञानस्य या परा ॥
सिद्धिम् प्राप्तः
सिद्धि प्राप्त करके
यथा ब्रह्म
जैसे ब्रह्म को
तथा आप्नोति
वैसे प्राप्त करता है
निबोध
जानो — सुनो
समासेन
संक्षेप में
निष्ठा
स्थिति — आधार
ज्ञानस्य या परा
ज्ञान की जो परम निष्ठा है

भगवान कहते हैं — हे कौन्तेय, सिद्धि प्राप्त करके ब्रह्म को कैसे प्राप्त किया जाता है — यह सर्वोच्च ज्ञान-निष्ठा मुझसे संक्षेप में सुनो।

यह श्लोक एक नई शिक्षा-धारा का द्वार खोलता है। सिद्धि प्राप्ति — और फिर ब्रह्म-प्राप्ति। ये दो चरण हैं। अगले श्लोकों में इनका विवरण आएगा।

यहाँ 'ज्ञानस्य परा निष्ठा' — ज्ञान की परम अवस्था — का उल्लेख है। यह अवस्था ब्रह्म-भाव में स्थिति है।

अगले तीन श्लोक (18.51-53) ब्रह्म-प्राप्ति के लिए आवश्यक साधनाओं का वर्णन करेंगे।

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