साधना के अगले चरण — एकांत में रहना, कम खाना, वाणी-शरीर-मन तीनों को संयत रखना, ध्यानयोग में सदा लगे रहना, और वैराग्य का आश्रय लेना।
ये व्यावहारिक साधनाएँ हैं। एकांत और अल्पाहार — ये भीतर की शांति के लिए जरूरी हैं। वाणी-संयम — बेकार बोलना बंद — यह ऊर्जा बचाता है।