भगवान स्पष्ट करते हैं — यज्ञ, दान और तप — इन्हें कभी नहीं छोड़ना चाहिए। ये तीनों कर्म ज्ञानी पुरुषों को पवित्र करते हैं। ये बाहरी क्रियाएँ नहीं, बल्कि जीवन को शुद्ध बनाने के साधन हैं।
यज्ञ का अर्थ है — किसी उद्देश्य के लिए समर्पित कर्म। दान का अर्थ है — बिना स्वार्थ के देना। तप का अर्थ है — अनुशासन के साथ जीना। ये तीनों गुण मिलकर मनुष्य को भीतर से सुंदर बनाते हैं।