भगवान कहते हैं — यज्ञ, दान, तप — इन्हें करो, पर आसक्ति और फल की चाहत छोड़ कर। यह मेरा निश्चित और श्रेष्ठ मत है। कर्म का होना जरूरी है, पर फल की लालसा का न होना जरूरी है।
यह श्लोक गीता की 'निष्काम कर्म' की शिक्षा का सार है। अच्छे काम करते रहो — यज्ञ करो, दान करो, तप करो — पर यह न सोचो कि इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा।