भगवान कहते हैं — 'हे भरतश्रेष्ठ, इस विषय में मेरा निश्चित मत सुनो।' वे स्पष्ट करते हैं कि त्याग तीन प्रकार का होता है। यहाँ वे सीधे उत्तर देने की मुद्रा में हैं।
यह श्लोक एक शिक्षक की तरह है जो कहता है — 'अब मैं बताता हूँ, ध्यान से सुनो।' अगले कई श्लोकों में तीन प्रकार के त्याग को विस्तार से समझाया जाएगा।