भगवान गुण-विवेचन का समापन इस महान कथन से करते हैं — न पृथ्वी पर, न स्वर्ग में देवताओं में — कोई भी ऐसा प्राणी नहीं जो प्रकृति के इन तीन गुणों से मुक्त हो।
यह बहुत बड़ी बात है। देवता भी गुणों से बंधे हैं। इसीलिए गीता में गुणों से ऊपर उठने की — 'त्रिगुणातीत' होने की — शिक्षा दी जाती है।