तामस धृति वह है जो मूढ़ को नींद, भय, शोक, विषाद और मद — इन सबसे नहीं छोड़ती। यह दृढ़ता नहीं, यह जड़ता है — इन्हीं में बंधे रहना।
यह दृढ़ता उल्टी दिशा में काम करती है। वह जिसे छोड़ना चाहिए, उसे छोड़ने नहीं देती। इसीलिए यह तामस — अंधकारमय — धृति है।
तामस धृति वह है जो मूढ़ को नींद, भय, शोक, विषाद और मद — इन सबसे नहीं छोड़ती। यह दृढ़ता नहीं, यह जड़ता है — इन्हीं में बंधे रहना।
यह दृढ़ता उल्टी दिशा में काम करती है। वह जिसे छोड़ना चाहिए, उसे छोड़ने नहीं देती। इसीलिए यह तामस — अंधकारमय — धृति है।
धृति की तीन श्रेणियाँ यहाँ समाप्त होती हैं। सात्त्विक — योग में थामती है। राजस — फल के लिए थामती है। तामस — बुराइयों को नहीं छोड़ती।
अगले श्लोकों (18.36-39) में सुख के तीन प्रकार का वर्णन आएगा।