राजस धृति वह है जो धर्म, काम और अर्थ — इन तीनों को फल की आसक्ति के साथ धारण करे। यह धृति है — दृढ़ता है — पर उसका उद्देश्य फल पाना है।
यह धृति बुरी नहीं — पर अधूरी है। जो व्यक्ति धर्म इसलिए पालता है कि उसे पुण्य मिले, या काम इसलिए करता है कि उसे लाभ हो — उसकी धृति राजस है।