भगवान कहते हैं — जब ये पाँच कारण हैं, तब जो व्यक्ति केवल आत्मा को ही कर्ता मानता है — वह दुर्बुद्धि है, वह सही नहीं देखता। यह अहंकार का सबसे घना रूप है।
हम अक्सर कहते हैं — 'मैंने यह किया।' गीता कहती है — यह अधूरी बात है। हाँ, तुमने किया — पर तुम्हारा शरीर, तुम्हारी इंद्रियाँ, परिस्थितियाँ, और ईश्वरीय विधान — सब मिलकर काम कर रहे थे।