भगवान कहते हैं — मनुष्य शरीर से, वाणी से, या मन से जो भी कर्म करे — चाहे वह उचित हो या अनुचित — उन सब के पीछे ये पाँच ही कारण काम करते हैं।
यह बहुत बड़ा कथन है। अच्छे-बुरे, धर्म-अधर्म — हर कर्म में ये पाँच घटक होते हैं। इसलिए कोई भी अकेला पूर्ण रूप से 'कर्ता' नहीं है।