यह श्लोक गीता के सबसे गहरे कथनों में से एक है। भगवान कहते हैं — जिसके मन में अहंकार नहीं, जिसकी बुद्धि कर्म में लिप्त नहीं होती — वह इन सबको मारकर भी वास्तव में न मारता है, न बंधता है।
यह अर्जुन के लिए विशेष संदेश है — युद्ध में शस्त्र उठाना पड़ेगा, पर यदि भाव शुद्ध है, अहंकार नहीं है — तो यह कर्म पाप नहीं बनता। कर्ता का भाव ही बंधन का कारण है।