📿 श्लोक संग्रह

पञ्चैतानि महाबाहो

गीता 18.13 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 18 — मोक्षसंन्यासयोग
पञ्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध मे ।
सांख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम् ॥
पञ्च एतानि
ये पाँच
कारणानि
कारण — हेतु
निबोध
जानो — समझो
सांख्ये कृतान्ते
सांख्य-सिद्धांत में
प्रोक्तानि
कहे गए हैं
सिद्धये
सिद्धि के लिए — पूर्णता के लिए
सर्वकर्मणाम्
सब कर्मों की

भगवान अब एक नए विषय में प्रवेश करते हैं। वे कहते हैं — सब कर्मों की सिद्धि के पाँच कारण हैं। ये सांख्य-सिद्धांत में वर्णित हैं। हे महाबाहो, इन्हें सुनो।

यह भाग बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है — कर्म केवल 'मैं' नहीं करता। इसमें पाँच तत्त्व मिलकर काम करते हैं। इससे अहंकार का भ्रम टूटता है।

सांख्य-दर्शन में कर्म को अनेक घटकों में विश्लेषित किया जाता है। गीता यहाँ उस विश्लेषण को उपयोग करती है।

अगले श्लोक (18.14) में ये पाँच कारण नामित किए जाएँगे। यह श्लोक उनकी भूमिका है।

अध्याय 18 · 13 / 78
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