भगवान अब एक नए विषय में प्रवेश करते हैं। वे कहते हैं — सब कर्मों की सिद्धि के पाँच कारण हैं। ये सांख्य-सिद्धांत में वर्णित हैं। हे महाबाहो, इन्हें सुनो।
यह भाग बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है — कर्म केवल 'मैं' नहीं करता। इसमें पाँच तत्त्व मिलकर काम करते हैं। इससे अहंकार का भ्रम टूटता है।