भगवान कृष्ण बताते हैं कि सात्त्विक लोगों को जो भोजन प्रिय होता है, वह आयु, बल, आरोग्य, सुख और प्रसन्नता को बढ़ाने वाला होता है। ऐसा भोजन रसीला, चिकना, देर तक शरीर में ठहरने वाला और हृदय को प्रसन्न करने वाला होता है।
सरल शब्दों में कहें तो — ताज़ा पका हुआ भोजन, दूध, फल, अनाज, शुद्ध घी, मौसमी सब्ज़ियाँ — ये सब सात्त्विक आहार हैं। ऐसा भोजन शरीर को पोषण देता है, मन को शांत रखता है और बुद्धि को तेज़ करता है।
दादी-नानी जो घर का बना ताज़ा खाना परोसती हैं — वही सात्त्विक आहार का सबसे सुंदर उदाहरण है। यह भोजन शरीर और मन दोनों का पोषण करता है।