यह सत्रहवें अध्याय का पहला श्लोक है। अर्जुन यहाँ भगवान कृष्ण से एक बहुत सुंदर प्रश्न पूछते हैं — जो लोग शास्त्रों में बताई गई विधि को छोड़कर, फिर भी मन में पूरी श्रद्धा रखते हुए पूजा करते हैं, उनकी स्थिति कैसी मानी जाए? क्या उनकी श्रद्धा सात्त्विक है, राजसिक है, या तामसिक?
अर्जुन का यह प्रश्न हम सबके मन में भी उठता है। बहुत-से लोग मंदिर जाते हैं, पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं — लेकिन शास्त्रों में बताई गई सटीक विधि उन्हें पता नहीं होती। फिर भी उनके मन में गहरी आस्था होती है। ऐसे लोगों की श्रद्धा किस श्रेणी में आती है — यही अर्जुन जानना चाहते हैं।
यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके उत्तर में भगवान कृष्ण पूरे अध्याय में श्रद्धा, आहार, यज्ञ, तप और दान — सबको तीन गुणों के आधार पर बाँटकर समझाते हैं।