यह सोलहवें अध्याय का अंतिम श्लोक है और पूरे अध्याय का सार एक वाक्य में है: शास्त्र को अपना प्रमाण (आधार) मानो।
भगवान कहते हैं — क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसका निर्णय शास्त्र के आधार पर करो। मनमानी नहीं, मन की इच्छा से नहीं — शास्त्र की विधि जो कहे, उसके अनुसार कर्म करो।
"ज्ञात्वा" — पहले जानो, समझो, फिर करो। भगवान अंधी श्रद्धा नहीं कह रहे — वे कह रहे हैं कि शास्त्र को जानो, उसकी विधि समझो, और फिर उसके अनुसार कर्म करो। यह बुद्धिपूर्ण श्रद्धा है।