भगवान कहते हैं — हे भरतवंशी, सत्त्वगुण मनुष्य को सुख में आसक्त करता है, रजोगुण कर्म में लगाता है, और तमोगुण ज्ञान को ढँककर प्रमाद (लापरवाही) में लगा देता है।
यह एक सारांश श्लोक है — तीनों गुणों का सार एक ही जगह बता दिया। सत्त्व = सुख की ओर खींचता है। रजस् = काम-धंधे की ओर खींचता है। तमस् = ज्ञान पर पर्दा डालकर भूल-चूक की ओर ले जाता है।
दैनिक जीवन में हम इसे आसानी से देख सकते हैं — सुबह जब मन शांत होता है, वह सत्त्व है; दिन में जब काम की भागदौड़ होती है, वह रजस् है; और शाम को जब थकान आती है और मन सुस्त हो जाता है, वह तमस् है।