भगवान कहते हैं — सत्त्वगुण में स्थित लोग ऊपर (उत्तम लोकों में) जाते हैं, राजसी लोग मध्य में (मनुष्य लोक में) रहते हैं, और तामसी लोग नीचे (अधोगति को) जाते हैं।
इसे ऐसे समझो — जैसे पानी में भारी चीज डूब जाती है, हल्की चीज तैरती रहती है, और बीच की चीज बीच में रहती है — वैसे ही सत्त्व हल्का होने से ऊपर ले जाता है, तमस् भारी होने से नीचे खींचता है, और रजस् बीच में रखता है।
यह श्लोक स्पष्ट संदेश देता है — जीवन में सत्त्वगुण बढ़ाना श्रेयस्कर है।