यहाँ से ज्ञान के लक्षणों की एक लंबी सूची शुरू होती है जो 13.8 से 13.12 तक चलती है। पहले आते हैं — मान न चाहना, दिखावा न करना, किसी को न सताना, क्षमाशीलता और सरलता।
फिर गुरु की सेवा, मन और शरीर की पवित्रता, स्थिरता और अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण। ये गुण ज्ञान के द्वार हैं। जैसे जड़ों के बिना पेड़ नहीं टिकता, वैसे इन गुणों के बिना ज्ञान नहीं टिकता।