कृष्ण यहाँ एक पड़ाव पर रुककर कहते हैं — इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय — तीनों संक्षेप में बताए गए। जो मेरा भक्त इन्हें भली-भाँति जान लेता है, वह मेरे भाव को प्राप्त होता है।
'मद्भाव' का अर्थ है — मेरे जैसा भाव, मेरी स्थिति। यह मोक्ष का एक कोमल शब्द है — जैसे गुरु कहे 'तुम मेरे जैसे हो जाओगे।' यह श्लोक ज्ञान और भक्ति को एक सूत्र में बाँधता है।